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Showing posts from 2016
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अमेरिका छोड़ इंडिया आकर बनाई ऐप, आज है करोड़ों की कमाई नई दिल्ली. भारत की दो कंपनियां 1 बिलियन डॉलर वैल्यूशन क्लब में शामिल हुई हैं। इनमें से एक है पेटीएम जिसके फाउंडर हैं विजय शेखर। शुरू में परिवार ने इनके इरादे का विरोध किया था। इसके बावजूद इन्होंने नौकरी छोड़कर पेटीएम नाम से ऐप बनाई। पेटीएम पहली भारतीय स्टार्ट-अप है जिसे अलीबाबा ने फंडिंग दी थी। बचपन में जूझे मुश्किलों से, लोगों की आसानी के लिए बनाया एप विजय ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर कॉलेज के दौरान ही इंटरनेट-बेस्ड बिज़नेस शुरू कर दिया था। छोटे प्लेटफाॅर्म से शुरू किए गए इस बिज़नेस को उन्होंने ऊंचाइयों तक पहुंचाया और फिर अमेरिकन कंपनी लोटस इंटरवर्क्स को बेच दिया। खुद 1999 में एक्सएस कॉर्पोरेशन से जुड़ गए। एक इंटरव्यू में विजय ने बताया था कि वे अलीगढ़ के पास हरदुआगंज गांव से हैं। वहीं एक हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़ने जाते थे। ऐसे में दिल्ली के एक बड़े कॉलेज से हायर एजुकेशन करने के बारे में सोचना भी चुनौतीपूर्ण था। पर वह नहीं चाहते थे कि उनके माता-पिता जिंदगीभर कुछ न कर पाने के लिए उन्हें ताने मारें। इसलिए दिल्ली में ...
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70 शहरों में चलती है इनकी OLA, लेकिन खुद पास नही है कार यह कहानी एक ऐसे आईआईटी पासआउट की है जिसने माइक्रोसॉफ्ट की जमी-जमाई नौकरी छोड़कर कैब कंपनी OLA स्थापित की। दिलचस्प यह भी है कि जिसकी कैब से 70 शहरों में लोग सफर करते हैं, उसने खुद के लिए कार नहीं खरीदा है। संक्षिप्त परिचय  नाम : भाविश अग्रवाल कंपनी : ओला पोस्ट : सीईओ क्या खास : देश के 70 शहरों में सक्रिय ओला हर दिन 1.50 लाख लोगों को आय के अनुरूप (10 से 17 रुपए प्रति कि.मी. की दर से) निजी परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाती है। आईआईटी मुंबई के कम्प्यूटर साइंस व इंजीनियरिंग ग्रैजुएट (बीटेक) भाविश अग्रवाल ने 2010-11 में ओला कैब्स की स्थापना की तो परिवार और दोस्तों ने उन्हें ‘क्रेजी’ कहा। माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च की नौकरी करते हुए भाविश ने अब तक दो पेटेंट्स प्राप्त किए थे। उनके तीन पेपर्स इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित हुए थे, पर ग्लोबल बिजनेस एग्जीक्यूटिव बनने के बजाय वे सेल्फ मेड एंटरप्रेन्योर बनना चाहते थे। माइक्रोसॉफ्ट में सुरक्षित भविष्य भी 9 से 5 की जॉब, भाविश की उकताहट को कम नहीं कर पाया। भाविश कहते हैं, मैं हमेशा से ही...
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ये हैं भारतीय मूल की 'पावर बिजनेस वुमन', 540 करोड़ है कंपनी का टर्नओवर बिज़नेस  : यह कहानी एक ऐसे भारतीय की है जिन्हें एशिया की 'पावर बिजनेस वुमन 2015' की लिस्ट में शामिल किया गया है। इनका नाम अमीरा शाह है। इन्हें इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैथाेलाॅजी लैब की सबसे कम उम्र की सेक्रेटरी माना जा रहा हैं। बताते चलें कि अमीरा बचपन से ही उत्साही उद्यमी थीं। 9-10 वर्ष की उम्र में स्कूल से छूटते ही वे पिता की पैथाेलॉजी लैब पहुंच जातीं और रिसेप्शनिस्ट की सहयोगी बन जातीं। आॅस्टिन से फाइनेंस मैनेजमेंट इन्फाॅर्मेशन सिस्टम में एमबीए की डिग्री प्राप्त करने के बाद अमीरा ने यूएसए में नौकरी की, लेकिन कारोबारी माहौल में पली-बढ़ी होने के कारण वे संतुष्ट नहीं थी। 2001 में वे भारत लौट आईं। पिता को भी बेटी की शिक्षा, क्षमता पर भरोसा था। उन्होंने अमीरा को अपनी लैब सौंप दी। अमीरा ने सबसे पहले ट्रेडिशनल बिजनेस का नाम (डॉ. शाहज लैब) बदला और फिर मुंबई की असंगठित पैथाेलॉजी लैब्स को बिजनेस पार्टनर बनाने का अभियान शुरू किया और देखते ही देखते मेट्रोपोलिस की डायग्नोस्टिक सेवाओं को सारे देश में पह...
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प्रेम गणपति की प्रेरक स्टोरी बिज़नेस : प्रेम गणपति एक साधारण इन्सान जिन्होंने भी हम-आप जैसे सपने देखे, और फिर पूरी मेहनत से उसे पूरा भी किया।  वे इडली और डोसा के बारे में कुछ भी नही जानते थे लेकिन फिर भी उन्होंने स्टाल लगाने की ठानी।  वे इडली, डोसा के बारे में जानने लगे, बनाने का प्रयास करने लगे और गलतिया करते गये।  ऐसा करते-करते उनका डोसा मुंबई में प्रसिद्ध हो गया था और आने वाले पाच सालो में 1992 से लेकर 1997 तक उनके स्टाल को एक बड़ी सफलता मिली।  लेकिन सोचने वाली बात यह है की मुंबई में और भी बड़े-बड़े डोसा के रेस्टोरेंट होने के बावजूद भी एक छोटे से स्टाल को इतनी बड़ी सफलता कैसे मिली।  प्रेम के अनुसार ये उनका स्वास्थ विज्ञान, दोसे को सही तरीके से पेश करने की कला और ताज़े मसालों और सब्जियों का कमाल था।  जिन्होंने लोगो का दिल जीत लिया था।  और उनके स्टाल को बाकी रेस्टोरेंट से अलग बनाया था। उन्होंने अपने स्टाल की सहायता से लाखो रुपये बचा कर रखे थे और पैसे कमाने के बाद घर जाने की बजाये उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा जोखिम उठाया और मुंबई में ही व...
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दिल्ली में सड़क के किनारे चाय बनाने वाले, 24 किताबों के लेखक लक्ष्मण राव दिल्ली:  ज़रूरी नहीं की जो आपका काम हो वही आपका आखिरी परिचय हो। संभव है दूसरा परिचय भी हो सकता है जो आपके काम से एकदम मेल नहीं खाता है। कुछ ऐसा ही परिचय है लक्ष्मण रॉव का। पेट पालने के लिए काम है चाय बनाना और लोगों को पिलाना, लेकिन असली परिचय है लेखक के तौर पर। लक्ष्मण रॉव अबतक 24 पुस्तकों को लिख चुके हैं जिनमें से 12 तो प्रकाशित हो चुकी हैं और 6 पुर्नमुद्रण की प्रक्रिया में हैं। उनके लिखे हुए उपन्यास ‘रामदास’ के लिये उन्हें दिल्ली सरकार की तरफ से इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। जब भी समय मिलता है 62 वर्षीय लक्ष्मण राव अपनी कलम लेकर कुछ-न-कुछ लिखना शुरू कर देते हैं और लेखन युवावस्था से ही उनके जीवन का एक हिस्सा रहा है। उन्होंने वर्ष 1979 में अपनी पहली पुस्तक प्रकाशित की थी। उनके सभी जानने वाले उन्हें ‘लेखकजी’ कहकर पुकारते हैं और यह संबोधन सुनकर लक्ष्मण राव की बांछे खिल जाती हैं। लेकिन उनका एक दूसरा परिचय भी है। अधिकतर लोगों की नजरों में लक्षमण अपनी टिन की केतली और कांच के क...
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अरबों की संपत्ति के मालिक हैं ये नाई, आज भी काटते हैं लोगों के बाल... बिज़नस :   बेंगलुरु में अगर आप ऐसे नाई से बाल कटवाना चाहते हैं जो रोल्स रॉयस जैसी कार से आता हो तो आपको 100 रुपए तक खर्च करने होंगे। रमेश बाबू नाम का यह नाई कोई आम नाई नहीं है। रमेश बाबू करोड़पति हैं और 67 कारों के मालिक हैं, जिनमें रोल्स रॉयस, मर्सिडीज, बीएमडब्लू जैसी महंगी कारें शामिल हैं। इन कारों की कीमत करीब 10 करोड़ रुपए है। रमेश के पास सुजुकी इंट्ररूडर की हाई एंड बाइक भी है, जिसकी कीमत 16 लाख रुपए है। रमेश बाबू जिस रोल्स रॉयस से चलते हैं, उसकी कीमत 3.1 करोड़ रुपए है। पूरे बेंगलुरु में रमेश बाबू के अलावा कुछ ही लोग हैं, जिनके पास रोल्स रॉयस जैसी कार है। वो भी कभी मामूली नाई हुआ करते थे, लेकिन अपनी दूरदृष्टि, मेहनत और लगन से आज अरबों के मालिक हैं। कौन हैं रमेश बाबू ? रमेश बाबू की उम्र 43 साल है। बेंगलुरु के अनंतपुर के रहने वाले रमेश जब 7 साल के थे, तभी उनके पिता गुजर गए। पिता की मौत के बाद रमेश बाबू की मां ने लोगों के घरों में खाना पकाने का काम किया, ताकि बच्चों का पेट भर सकें। रमेश के पिता की दुकान...
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वैलेंटाइन डे पर राशि के अनुसार चुने अपना पार्टनर वैलेंटाइन डे यानी प्रेम के नाम एक हसीन दिन। इसके नाम से आशिकों के दिलों में इश्क की घंटियां बजने लगती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर राशि का दूसरी राशि से एक विशेष संबंध होता है। अगर राशि के अनुसार प्रपोज किया जाए तो प्रेम-प्रसंग के सफल होने की संभावना ज्यादा होती है। जानिए इस वैलेंटाइन डे पर राशि के अनुसार कैसे करें प्रपोज कि आपकी लव लाइफ हो जाएगी हिट। मेष इस राशि के लोगो में अहम की मात्रा कुछ ज्यादा होती है। ये हर चीज को दूसरी घटनाओं से जोड़कर देखते हैं। इन्हें आमतौर पर कीमती गिफ्ट पसंद आते हैं, मगर इनकी भावनाओं का खास ध्यान रखें। इन्हें रिश्ते की मजबूती की भरोसा दिलाएं। वृष-  ये भरोसेमंद साथी साबित होते हैं। कुछ जातक भ्रमण-प्रेमी और मेल-मिलाप में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। इनके साथ रिश्ते की शुरुआत सोच-समझकर करें, क्योंकि गलत शुरुआत आपको नुकसान पहुंचा सकती है। इन्हें चमकीले और सफेद रंग के तोहफे ज्यादा पसंद होते हैं। मिथुन ये अक्सर रिश्ते को लेकर भ्रम की स्थिति में होते हैं। इनकी पसंद परिस्थितियों के अनुसार बदल जाती है।...
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इस वैलेंटाइंस डे को कैसे मनाये खास? लाइफस्टाइल :  दोस्तों प्यार एक ऐसा शब्द है जिससे दुनिया का कोई ऐसा शख्स होगा जो कि परिचित नहीं होगा? हर किसी के दिल में सुंदर साथी और उसका प्यार पाने की चाहत होती है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि कोई कह देता है तो किसी के दिल में भावनाएं कैद रहती हैं। यह शब्द ऐसा है, जिस पर ना जाने कितनी गजलें, कविताएं कहानियां लिखी गयीं हैं। वक्त बदला लोगों की पसंद बदली लेकिन ना एहसास बदला और ना ही मुहब्बत का तस्सव्‍वुर। एक बार फिर से प्यार की बयार खिली हैं। मोहब्बत ने अंगड़ाई ली हैं और आपके प्यार का दिन  'वैलेनटाइंस डे' यानी कि 14 फरवरी बहुत जल्द आने वाला है। जो प्यार पर भरोसा करते हैं उन्हें तो इस दिन का बेसब्री से इंतजार होगा लेकिन जो नहीं करते हैं उन्हें भी इस दिन के बारे में जानने की उत्सुकता बनी रहती हैं। आईये इस बार हम अपने प्यार को कुछ नये तरह से सेलिब्रेट करें। इसलिए  "घमासान न्यूज़"  आपके लिए एक ऐसा मंच लेकर आ रहा है जो आपकी अनकही बातों को आपके अपनों के दिल तक पहुंचायेगा। प्रेम के ढाई अक्षर को कहने के लिए हो सकता है कि आपको बर...
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जानिए कौन है संदीप माहेश्वरी..? मुंबई:  इन दिनों, बहुत से लोग ऐसे है जो किसी के निचे काम करना नहीं चाहते है। इसके बजाय, वे तो बस अपनी विशेष रुचि या क्षेत्र में अपने स्वयं का कोई बिज़नस करना चाहते है। और हमारे भारत देश में उद्यमियों का इस तरह बढ़ने का कारन बेरोजगारी है। भारत में उद्यमियों की बढती लिस्ट में संदीप माहेश्वरी भी उन मेसे एक है। लोगो में संदीप माहेश्वरी की पॉपुलैरिटी इन्टरनेट पर लोगो के द्वारा संदीप माहेश्वरी की बायोग्राफी सर्च करते हुए ही दिख रही है। यह उसके प्रति लोगों में संदीप माहेश्वरी की पॉपुलैरिटी और प्यार का पता चलता है संदीप माहेश्वरी भारत देश के सबसे बड़े उद्यमियों में से एक है। वो किरोड़ीमल कॉलेज में बिच ही अपनी पढाई छोड़ दी थी, जो कॉलेज दिल्ली के विश्वविद्यालय में है। वो इसी कॉलेज से कॉमर्स के बैचलर से ग्रेजुएशन ले रहे थे। लेकिन दुर्भाग्य से वह अपने व्यक्तिगत कारणों की वजह से ग्रेजुएशन पूरी नहीं कर सके। संदीप माहेश्वरी की सक्सेस के बारे में और उनके सक्सेस के मंत्र को हर कोई जानने को उत्साहित है। उन्होंने अपने फोटोग्राफी (Photography) का करियर 2000 मे...
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जानिए किसे कहते है क्वीन ऑफ़ मोबाइल फ़ोन ग्लास और क्यों ..? बिज़नस :  कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जिन पर हमको तब तक यकीन नहीं होता जब तक हम उन्हें हकीकत में न देख लें। और आज हम आपके साथ एक ऐसी ही स्टोरी शेयर कर रहे है जिसे अगर कोई बताता तो शायद आप यकीन नहीं करते लेकिन आज वो एक वास्तविकता है। ये कहानी है Zhou Qunfei / झोऊ क़ुएन्फ़ेइ की। एक ऐसी लड़की जिसका जन्म चाइना के एक छोटे से गाँव में हुआ, जिसने बचपन से ही गरीबी देखी, जिसकी माँ उसे 5 वर्ष की छोटी अवस्था में दुनिया छोड़ कर चली गयी और जिसके पिता उसके जन्म से पहले ही अंधे हो गए हों… एक ऐसी लड़की जो कभी सिर्फ रोज का 1 डॉलर कमाती हो….आज वही लड़की दुनिया की सबसे अमीर self made women उद्यमी है, आज वही लड़की चाइना की सबसे अमीर महिला है और आज वही लड़की 6 billion dollar यानि चालीस हज़ार करोड़ रुपये की मालकिन है। आजकल सभी स्मार्टफोन कम्पनियाँ मोबाइल फ़ोन की स्क्रीन पर स्क्रीन गॉर्ड का इस्तेमाल करती हैं। ये स्क्रीन गार्ड मोबाइल फ़ोन की स्क्रीन को स्क्रैच से बचाता है। इस ग्लास का आविष्कार Zhou की कम्पनी ने ही किया है। जिसके लिए उन्हें  “Quee...
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कैसे शुरू करें (RO Water) पानी का बिजनेस? बिज़नेस:  आपने अक्सर देखा होगा कि पानी के कंटेनर्स से लदी छोटी-छोटी गाड़ियाँ सड़कों पर दौड़ती रहती हैं। इनका काम होता है पानी के jars या cans को दुकानों और घरों तक पहुंचाना। ये एक तेजी से फैलता हुआ बिजनेस है, यानि बहुत से लोग इस बिजनेस में हाथ आजमा रहे हैं और अपनी पूंजी लगा कर इसे शुरू कर रहे हैं. आरओ पानी संयंत्र के व्यापार में: आप किसी जगह पर एक RO Plant लगवाते हैं।  उस प्लांट से फिल्टर्ड पानी को आप एक container (कूल केज, cool jug, jar या ट्रांसपेरेंट bottle) में फिल करते हैं।  और फिर इन्हें अपने customers को पहुंचाते हैं। पानी यूज हो जाने के बाद आपको अपना container वापस भी लेना होता है। और आप इस सर्विस के लिए per jar के हिसाब से चार्ज करते हैं। पानी पहुंचाने और खाली बोतल लाने का काम टाटा ऐस और टेम्पो जैसी गाड़ियों से होता है लेकिन अगर आस-पास का आर्डर है तो साइकिल या किसी two-wheeler से भी पानी डिलीवर किया जाता है। पिछले 15-20 दिनों में मैं इस बिजनेस को करने वाले 3-4 लोगों से मिली, एक सज्जन से मिलने के लिए तो मुझ...