अमेरिका छोड़ इंडिया आकर बनाई ऐप, आज है करोड़ों की कमाई
नई दिल्ली. भारत की दो कंपनियां 1 बिलियन डॉलर वैल्यूशन क्लब में शामिल हुई हैं। इनमें से एक है पेटीएम जिसके फाउंडर हैं विजय शेखर। शुरू में परिवार ने इनके इरादे का विरोध किया था। इसके बावजूद इन्होंने नौकरी छोड़कर पेटीएम नाम से ऐप बनाई। पेटीएम पहली भारतीय स्टार्ट-अप है जिसे अलीबाबा ने फंडिंग दी थी। बचपन में जूझे मुश्किलों से, लोगों की आसानी के लिए बनाया एप
विजय ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर कॉलेज के दौरान ही इंटरनेट-बेस्ड बिज़नेस शुरू कर दिया था। छोटे प्लेटफाॅर्म से शुरू किए गए इस बिज़नेस को उन्होंने ऊंचाइयों तक पहुंचाया और फिर अमेरिकन कंपनी लोटस इंटरवर्क्स को बेच दिया। खुद 1999 में एक्सएस कॉर्पोरेशन से जुड़ गए।
एक इंटरव्यू में विजय ने बताया था कि वे अलीगढ़ के पास हरदुआगंज गांव से हैं। वहीं एक हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़ने जाते थे। ऐसे में दिल्ली के एक बड़े कॉलेज से हायर एजुकेशन करने के बारे में सोचना भी चुनौतीपूर्ण था। पर वह नहीं चाहते थे कि उनके माता-पिता जिंदगीभर कुछ न कर पाने के लिए उन्हें ताने मारें।
इसलिए दिल्ली में एडमिशन लिया। वे कहते हैं- पहले अंग्रेज़ी बोलने में दिक्कत आई। फिर अंग्रेजी में ही सोचना शुरू कर दिया जिसे ट्रांसलेट करने की जरूरत ही न हो। वे दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज में सबसे कम उम्र के ग्रेजुएट हैं। कॉलेज खत्म होने पर अमेरिका चले गए। यहीं उन्होंने भारत में कुछ बड़ा करने का मन बना लिया।
अपने इस सपने के बारे में जब परिवार को बताया तो मां रोने लगी और पिता व बहन ने विरोध किया। पर वह अडिग रहे। उन्होंने 2000 में भारत आकर वान97 कम्युनिकेशन्स की स्थापना की, जो मोबाइल से जुड़ी वैल्यू-एडेड सर्विसेस देती है। 2010 में आईपीओ (पब्लिक इश्यू) लाने का सोचा, लेकिन विफल रहे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था - आईपीओ न ला पाना सबसे बड़ी विफलता है। इसके दु:ख से बाहर आने के लिए पेटीएम लॉन्च किया। यह इंस्टेंट मोबाइल रिचार्ज एप था, जहां यूजर्स को आकर्षक ऑफर्स मिलते हैं।
नाम- विजयशेखर शर्मा, जन्म- 8 जुलाई 1973
शिक्षा- दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की।
परिवार- पिता- सुलोम प्रकाश स्कूल टीचर और मां गृहिणी। एक बहन है। खुद शादीशुदा हैं।

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