निसंतान जोड़ों के लिए आशा की एक किरण :शैफाली जैन



इंदौर :  संतान हर निसंतान दंपति का सपना है। उनका जीवन संतान के बिना अधूरा हैं। वर्तमान में बांझपन की संख्या करीब 10-12% है और दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। एशियाई इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफर्टिलिटी मैनेजमेंट (AIIM), इंदौर सभी निसंतान दंपति की मदद करना चाहता है, न कॉवेल भारत में बल्कि यू.के ,यू.एस, ऑस्ट्रेलिया , दुबई और यूगांडा जैसे देशों में भी .
AIIM प्रभावी, सुरक्षित और साक्ष्य आधारित उपचार करता है। यह ट्रीटमेन्ट ISO-9001 से सर्टिफाइड है, जो की अपने हाई क्वालिटी क्लीनिकल ​​काम पर ज़ोर देता हैं। इस सेंटर ने लगातार अपने ट्रीटमेंट से ज्यादातर IVF-ICSI समस्याओं का समाधान किया जो की लगातार सफल हुए है।
लगातार 19 वर्षों से अच्छा काम कर डॉ. शैफाली ने लोगों का भरोसा जीता हैं। डॉ. शैफाली जैन और डॉ. दिनेश जैन दोनों ही हाई क्वालिफाइड डॉक्टर्स हैं, जिन्होंने 10,000 हज़ार से भी ज्यादा लोगों को अपनी कड़ी मेहनत के द्वारा निसंतान लोगों को वापस संतान का सुख पाने का अवसर दिया हैं, अपने टेस्ट ट्युब सेंटर की मदद से। टेस्ट ट्युब तकनीक अब और भी ज्यादा सुरक्षित है और अगर यह उपचार AIIM के असाधारण लैब्स में जो की सात इंक्यूबेटर्स, एयर हैंडलिंग यूनिट्स, अंतरराष्ट्रीय मानक गुणवत्ता नियंत्रण, उचित डेवलपमेंट ट्रीटमेंट साइकिल के साथ किया जाये तो सफलता जरूर होगी। डॉ. शैफाली ने बताया की AIIM में क्या ट्रीटमेंट होता हैं, यहां "वर्ल्ड क्लास सेवाएं दी जाती है जैसे- ICSI, सरोगेट मां, सीमेन प्रोसेसिंग, एग डोनेशन, भ्रूण फ्रीजिंग, IMSI, लेज़र असिस्टेड हैचिंग , शल्य शुक्राणु पुनर्प्राप्ति और ब्लास्टोसिस्ट हस्तांतरण में विश्व स्तरीय सेवाएं प्रदान की जाती है।
एशियाई इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफर्टिलिटी मैनेजमेंट ने कमिट किया है की वे अपना सबसे अच्छी सेवा के साथ घरेलू अनुभव भी प्रदान करेंगे। अन्य देशों के संतुष्ट ग्राहकों ने उनकी तकनीक और स्वस्थ वातावरण का प्रशंसा की है जहां उनको उनका नया जीवन प्राप्त हुआ है। रजनी बाजपाई ने यू.एस.ए से कहा "सरोगेट मां और आईवीएफ तकनीक USP है एशियाई इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफर्टिलिटी। मैं वहां पर एक बार ही गई हूँ यू.एस से। सौम्या विजय ने कहा डॉ शैफाली और अन्य कर्मचारियों के साथ एक परिवार की तरह जुड़ाव हो जाता है। अशप्रीत Saini ने ऑस्ट्रेलिया से कहा की यह इंस्टिट्यूट फैसिलिटीज और ट्रीटमेंट के मामलो में बहुत ही अच्छा है।

-अंजलि रॉय (संपादक) 

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