इस दिन 14 दीपक जलाने से होगी बैकुंठ धाम की प्राप्ति
इस दिन 14 दीपक जलाने से होगी बैकुंठ धाम की प्राप्ति

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को बैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाती है। यह पर्व भगवान विष्णु याने के ‘हरी’ और भगवान शिव याने ‘हर’ के ‘हरिहर’ स्वरूप को समर्पित है। इस पूजन से बैकुंठ लोक की प्राप्ति होगी ऐसा आशीर्वाद स्वयं विष्णु ने नारद जी के माध्यम से मानवजन को दिया था। इसे बैकुण्ठ चौदस के नाम से भी जाना जाता है। आज के दिन नर्मदेश्वर शिवलिंग को तुलसी अर्पित की जाती है।
दरअसल चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु अपना सारा कार्यभार भगवान शंकर को सौंपकर निद्रा में चले जाते हैं और चार महीनों के बाद वैकुण्ठ चतुर्दशी के दिन निद्रा से उठते हैं और भगवान शंकर का पूजन करते हैं और भगवान शंकर फिर से उन्हें सृष्टि का सारा कार्यभार सौंप देते हैं।
आज के दिन विशेष रूप से काशी में बाबा विश्वनाथ का पंचोपचार विधि से पूजन किया जाता है और उनकी महाआरती की जाती है। आज के दिन व्रत किया जाता है और सरोवर, नदी इत्यादि के तट पर 14 दीपक जलाने की परंपरा रही है। इससे घर में सुख-समृद्धि की प्रप्ति होती है और बैकुंठ को प्राप्त करते हैं।

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