जानिए - बाजीराव-मस्तानी के इतिहास की अनकही दास्तां
मुंबई : बाजीराव-मस्तानी फिल्म ने भारत के इतिहास के एक सुनहरे किस्से को हर जुबां पर जिंदा कर दिया है। आइए जानते हैं, बाजीराव-मस्तानी के बारे में वो हर बात जिसे न जानकर आप भारत के बीते हुए अध्याय की एक रेश्मी गाथा से दूर रह जाएंगे...... बाजीराव मस्तानी' कहानी मराठा इतिहास की जबरदस्त प्रेम कहानी है। जो कि मराठा बाजीराव पेशवा और उनकी दूसरी पत्नी मस्तानी पर आधारित है।इस प्रेम कथा पर संजय लीला भंसाली फिल्म भी बना रहे हैं। इसमें रणवीर सिंह बाजीराव की भूमिका में दिखाई देंगें तो वहीं दीपिका पादुकोण मस्तानी और प्रियंका चोपड़ा बाजीराव की पहली पत्नी काशीबाई की भूमिका में नजर आएँगी।
300 साल पहले, सन 1700 में छत्रपति शिवाजी के पौत्र शाहूजी महाराज ने बाजीराव के पिता बालाजी विश्वनाथ की मौत के बाद उसे अपने राज्य का पेशवा यानी प्रधानमंत्री नियुक्त किया। 20 साल की उम्र में कमान संभालने वाले बाजीराव ने अपने शासन काल में 41 युद्ध लड़े और सभी में जीत हासिल की। बचपन से बाजीराव को घुड़सवारी करना, तीरंदाजी, तलवार भाला, बनेठी, लाठी आदि चलाने का शौक था। पेशवा बनने के बाद अगले बीस वर्षों तक बाजीराव मराठा साम्राज्य को बढ़ाते चले गए। इसके लिए उन्हें अपने दुश्मनों से लगातार लड़ाईयां करनी पड़ी। अपनी वीरता, अपनी नेतृत्व क्षमता व कौशल युद्ध योजना द्वारा यह वीर हर लड़ाई को जीतता गया।
विश्व इतिहास में बाजीराव पेशवा ऐसा अकेला योद्धा माना जाता है जो कभी नहीं हारा। छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह वह बहुत कुशल घुड़सवार था। घोड़े पर बैठे-बैठे भाला चलाना, बनेठी घुमाना, बंदूक चलाना उनके बाएं हाथ का खेल था। घोड़े पर बैठकर बाजीराव के भाले की फेंक इतनी जबरदस्त होती थी कि सामने वाला घुड़सवार अपने घोड़े सहित घायल हो जाता था। इस समय भारत पर मुगलों का अधिपत्य कमजोर हो रहा था और जनता अंग्रेजों व पुर्तगालियों के अत्याचारों से त्रस्त हो चुकी थी। ऐसे में बाजीराव पेशवा ने उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक ऐसी विजय पताका फहराई कि चारों ओर उनके नाम का डंका बजने लगा।
लोग उन्हें शिवाजी का अवतार मानने लगे। बाजीराव में शिवाजी महाराज जैसी ही वीरता व पराक्रम था। बाजीराव अपने पराक्रम के साथ जीवनभर जिस वजह से जाने जाते रहे वह मस्तानी के साथ उनकी प्रेम कहानी थी। वीजी दिघे की किताब ‘पेशवा बाजीराव ऐंड मराठा एक्सपेंशन’ में बाजीराव को देवलोक से आए एक नायक बताया गया है। एक लंबे और असाधारण सम्राज्य में बाजीराव की बहादुरी और कामयाबी की कोई तुलना नहीं। बाजीराव ने 41 लड़ाइयां लड़ीं और सभी जीतीं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बुद्धिकौशल से भरा हुआ उनका महकमा ही था, जो बाजीराव ने ही बनाया था। उनका खुफिया तंत्र बेहद मजबूत ता और उसके पास शत्रु सेना की हर जानकारी रहती थी।
-अंजलि रॉय (संपादक)
अधिक जानकारी के लिए पढ़े घमासान न्यूज़
अधिक जानकारी के लिए पढ़े घमासान न्यूज़

Comments
Post a Comment