"पश्चिम बंगाल में सुभाष लहर"
नरेन्द्र मोदी की किस्मत कहें या राजनितिक अवसर, पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव के पहले सुभाष चन्द्र बोस की मौत की रहस्यमय फाइलें खोलने का वादा मोदी ने कर दिया है।
बोस के परिवार वालों से अपने परिजनों की तरह मिलकर भावनात्मक रूप से लड़ाई जीतने की शुरुआत कर दी। मोदी को पता है फाइलों में जो भी निकलेगा, उससे कांग्रेस मुसीबत में आएगी। वैसे ममता बनर्जी भी यह दाव पहले खेल चुकी है। कांग्रेस से हटकर अपनी कांग्रेस बनाने वाली ममता जानती है, कि मोदी बिहार के बाद पश्चिम बंगाल पर कब्ज़ा करना चाहते है। चाहे कुछ भी हो जाये जीत हमारी होना चाहिए, ऐसी विचारधारा को लेकर काम करने वाले भाजपा कप्तान अमित शाह की टीम बिहार से फ्री होते ही बंगाल में डेरा डालेगी।
कुछ दिन पहले ममता और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच हुई छोटी सी भिडंत ने इशारा कर दिया है, कि वहां भाजपा हर तरह से लड़ेगी। जब बंगाल में भाजपा को कार्यकर्ताओं का टोटा दिखा, तो पार्टी ने उन सब बाहुबलियों पर हाथ रखना शुरू कर दिया जो ताकत के बल पर भाजपा को फायदा दिला सकते है। बिहार चुनाव के परिणाम का असर बंगाल की तैयारी पर भी दिखेगा, लेकिन जब बाहुबलियों के साथ भाजपा मैदान में उतरेगी तो ममता को भी वही रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा।
कुछ दिन पहले ममता और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच हुई छोटी सी भिडंत ने इशारा कर दिया है, कि वहां भाजपा हर तरह से लड़ेगी। जब बंगाल में भाजपा को कार्यकर्ताओं का टोटा दिखा, तो पार्टी ने उन सब बाहुबलियों पर हाथ रखना शुरू कर दिया जो ताकत के बल पर भाजपा को फायदा दिला सकते है। बिहार चुनाव के परिणाम का असर बंगाल की तैयारी पर भी दिखेगा, लेकिन जब बाहुबलियों के साथ भाजपा मैदान में उतरेगी तो ममता को भी वही रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा।
भाजपा बंगाल में करोड़ों रुपया फूंक देगी, टिकट उनको मिलेंगे जिनके पास ताक़त और पैसा दोनों होगा। सुभाष चन्द्र बोस के नाम पर जो शुरुआत मोदी ने की है, वह पश्चिम बंगाल की जनता का ध्यान बाँटने के लिए काफी है। जब मोदी के प्रधानमंत्री आवास पर बोस का परिवार मिल रहा था, तो लग रहा था कि वो भी भाजपा की शरण में आ गये है। बोस के परिवार वालों के चुनाव लड़ने की ख़बरें भी छप रही है, वैसे मोदी को अकेले सुभाष लहर से फायदा नही होगा। कहते है कि बूंद बूंद से घड़ा भरता है इसीलिए भाजपा ने एक-एक सीट जीतने के लिए हज़ार तरीके अपनाना शुरू कर दिए। यह तरीके भाजपा को सत्ता भले ही न दिला पाए लेकिन नजदीक तो ले आएगी।
अभी तो गठबंधन का दौर चलेगा, विधायक बिकेंगे, टिकटों का बंटवारा होगा। बिहार की तरह मोदी पश्चिम बंगाल में भी जाकर करोड़ों के विकास का दावा करेंगे। मोदी को ये बात समझ में आ चुकी है, कि अकेले दिल्ली पर कब्ज़ा करने से मनमाने काम वो नही कर पाएंगे। इसीलिए उनको हर राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी भी कब्जे में लेनी पड़ेगी। आजादी के बाद पहली बार बंगाल में ऐसा चुनाव होगा जहाँ दो ताकतें एक साथ होंगी। ममता बनर्जी के भी अस्तित्व का सवाल है इसीलिए डूबता क्या न करता की तर्ज़ पर उन्होंने भी चुनावी तैयारी शुरू कर दी है।
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें घमासान न्यूज़अभी तो गठबंधन का दौर चलेगा, विधायक बिकेंगे, टिकटों का बंटवारा होगा। बिहार की तरह मोदी पश्चिम बंगाल में भी जाकर करोड़ों के विकास का दावा करेंगे। मोदी को ये बात समझ में आ चुकी है, कि अकेले दिल्ली पर कब्ज़ा करने से मनमाने काम वो नही कर पाएंगे। इसीलिए उनको हर राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी भी कब्जे में लेनी पड़ेगी। आजादी के बाद पहली बार बंगाल में ऐसा चुनाव होगा जहाँ दो ताकतें एक साथ होंगी। ममता बनर्जी के भी अस्तित्व का सवाल है इसीलिए डूबता क्या न करता की तर्ज़ पर उन्होंने भी चुनावी तैयारी शुरू कर दी है।

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