"गुजरात सरकार के खिलाफ हिंसक युद्ध"

25 अगस्त 2015 को पाटीदार आंदोलन के समर्थन मैं अहमदाबाद में पाटीदारों का सैलाब सड़कों पर था। इसी दिन ने पाटीदार आंदोलन ने कन्वीनर हार्दिक को एक नई पहचान दी। मंच से हार्दिक गांधी के रास्ते पर चलने की दुहाई देते रहे। शाम होते ही हार्दिक की गिरफ्तारी पर गुजरात के कई शहरों मैं हिंसा ने उग्र रूप लिया। हार्दिक और उनके साथी सोशल मीडिया पर और टीवी चैनलों पर पाटीदारों से हिंसा न करने की अपील करते रहे। फिर भी हिंसा कई जगहों पर दो दिन तक चली।

पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और पांच अन्य लोगों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह के गंभीर आरोपों के तहत दर्ज 27 पृष्ठों वाली प्राथमिकी में कहा गया है कि हार्दिक ने अपने समुदाय के लोगों को गुजरात सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की खातिर हिंसक तरीके अपनाने के लिए कथित तौर पर उकसाया। राजकोट में भारत- दक्षिण अफ्रीका वनडे मैच से पहले पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की स्थिति में अपने सभी सहयोगियों से गुजरात के सारे राजमार्गों की नाकेबंदी करने को कहा था। हार्दिक ने मैच बाधित करने की धमकी दी थी।

हार्दिक पटेल 19 सितंबर को बदहवास नज़र आए। उन्होंने अलग अलग स्थानों से एकता यात्रा शुरु करने की कोशिश की और आख़िरी समय में सूरत के पटेल बाहुल्य इलाक़े वारच्छा से रैली शुरू की, लेकिन वहां बमुश्किल 50 लोग एकत्रित हो पाए।
पुलिस ने पहले तो वहां बैठक करने की इजाजत दी और बाद में हार्दिक और उनके 30 समर्थकों को हिरासत में ले लिया। देर रात में उन्हें रिहा किया गया और इस दौरान ना तो कोई विरोध प्रदर्शन हुआ, ना हिंसा हुई, कुछ नहीं हुआ।
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें घमासान न्यूज़

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