कौन है 'बिकनी किलर' चार्ल्स शोभराज

बॉलीवुड में इस शुक्रवार को एक फिल्म रिलीज़ होने वाली हैं जिसका नाम हैं " Main Aur Charles " इस फिल्म में लीड रोले में हैं जाने माने एक्टर रणदीप हूडा और अभिनेत्री ऋचा चड्डा। इस फिल्म के डायरेक्टर हैं प्रवाल रमन.. यह कहानी एक काल्पनिक थ्रिलर हैं जो की एक सत्य घटना पर आधारित हैं। जो चार्ल्स शोभराज की जिन्दगी पर आधारित है.... तो आइये जानते इस चार्ल्स शोभराज के बारे में...

कौन हैं Charles Sobhraj...?    
आज हम आपको चार्ल्स शोभराज के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे लोग कभी Bikini Killer तो कभी सांप कह कर बुलाते हैं । जब वह आजाद होता था तो पूरी दुनिया की पुलिस उसके पीछे रहती थी और जब वो कैद में है तब भी जेल के बाहर पुलिसवालों की नींद हराम रहती है। जरा सोचिए, कोई शख्स एक साल में लाखों डॉलर कमा ले और उसकी जिंदगी इस संतोष के साथ जेल में बीते कि एक दिन वह जेल से छूटेगा और फिर अपनी पुरानी जिंदगी में वापस लौट आएगा। वह कैसा होगा?

शोभराज वैसे तो वियतनामी-भारतीय है पर उसने फ्रांस की नागरिकता ले ली थी। हत्या के जुर्म में उसे उम्रकैद की सजा मिली। उस पर कई हत्याओं के आरोप लगे जिसके लिए उसे फांसी की सजा होनी चाहिए थी, लेकिन कई हत्याओं को कथित रूप से अभियोजन पक्ष ने ही छिपा लिया।

चार्ल्स एक चालाक और शातिर अपराधी है। हत्या, लूटपाट, नशीली दवाएं बेचना, आभूषणों की चोरी इत्यादि उसके लिए सामान्य काम है। उसके जोखिम और साजिश से भरपूर जिंदगी को मीडिया में इतनी जगह मिली कि वह मशहूर हो गया।

जेल में भी वह इतने मजे से रहता है कि कोई सुने तो ईर्ष्या हो जाए। जेल में रहने के बावजूद उसके पास टाइपराइटर, टीवी, रेफ्रीजिरेटर, और एक बड़ा पुस्तकालय हुआ करता था। इसके अलावा वह अपने साथी कैदियों को खुश करने के लिए ड्रग्स भी रखता था। फिलहाल चार्ल्स नेपाल के काठमांडू जेल में बंद है। बेशक चार्ल्स को वहां पहली जेल जैसी सुविधाएं नहीं कराई गई हैं लेकिन वह फिर भी यदाकदा चर्चा में आता रहता है।

जिस समय भारतीय अदालत से 52 वर्षीय शोभराज को हत्या के जुर्म में कड़ी सजा मिली थी। उसी दौरान उसने दिल्ली के तिहाड़ जेल में रहते हुए अपनी जिंदगी पर बनने वाली हॉलीवुड फिल्म के लिए 15 मिलियन डॉलर यानी आज की मुद्रा दर के हिसाब से 90 करोड़ रूपयों का सौदा किया। और तो और जब वह पेरिस से लौटा था तो उसने मिडिया को अपना इंटरव्यू देने की लिए भी 5000 डॉलर वसूले थे।
 
चार्ल्स की मनोदशा को बचपन के दुष्प्रभाव, दिमाग पर चोट लगना, अत्यधिक उदासीन होना या माता-पिता का क्रूर व्यवहार होना से नहीं जोड़ा जा सकता। ये सारी चीजें सीरियल किलरों की पृष्ठभूमि को बयां करती हैं। लेकिन चार्ल्स शोभराज के मानसिक बीमारी के पीछे क्या था?
 
मनोवैज्ञानिक बॉब हरे ने अपने शोध के आधार पर बताया कि यह जरुरी नहीं हैं कि जो लोग बुरा बर्ताव करे उन्हें पहले कोई मानसिक आघात हुआ हो। उनका कहना है कि शोभराज लोगों को सेक्स के दौरान आई खिन्नता की वजह से नहीं मारता था। बल्कि वह लोगों को अपने फायदे के लिए मारता था। वह उन लोगों के पासपोर्ट तथा दूसरे पहचान संबंधी कागजों का उपयोग तस्करी तथा कई गैर कानूनी धंधे चलाने में करता था।

वह उन लोगों को ही मारता था जो उसके रास्ते में होते थे या फिर जिसको मारने से उसको फायदा होता था। उसने अपने व्यवसाय के लिए लोगों का कत्ल किया या करवाया। चार्ल्स शोभराज का बचपन उसके माता–पिता के रहने के बावजूद एक परित्याग किए हुए बच्चे की भांति था। भारतीय पिता और अविवाहित वियतनामी मां के बीच आपसी मतभेद का असर बड़े हो रहे चार्ल्स पर पड़ा।

इसके कारण उसका बचपन उदासियों में बीता। पहले बच्चे के जन्म के बाद ही उसके पिता ने उसकी मां को छोड़ दिया। उसकी मां सोंग का कहना था कि इस अलगाव की वजह कारण उसके पिता ही थे। उसके पिता चार्ल्स के लिए बचपन में ही कुछ करना चाहते थे, पर चार्ल्स दिमाग में यह बैठ गया था कि उसके पिता उसे अपनी ही तरह बनाना चाहते थे।

जेल की दुनिया देख कांप उठा था उसका रूह
चार्ल्स जेल कई बार गया। वह अपने आप को इस तरह जेल के अनुकूल बना लेता था, कि लगता था वहां सब उसके जानने वाले हैं। लेकिन एक घटना वर्ष 1963 की है जब वह पहली बार जेल गया था। भयानक और खूंखार कैदियों के बीच चार्ल्स वहां के लिए छोटी मछली था। लेकिन चार्ल्स को कराटे का ज्ञान था जिसका वह अपने बचाव के लिए इस्तेमाल करता था। 16वी शताब्दी में बना पोईसी जेल पेरिस शहर से दूर एक एकांत जगह पर था। पहले वह बैरागियों का निवास था लेकिन बाद में फ्रेंच क्रांति के समय उसे जेल में तब्दील कर दिया गया था।
इस कैदखाने की दीवारें इतनी मोटी और ऊंची थीं कि इस दुनिया का बाहरी दुनिया का कोई वास्ता नहीं था। इसमें बने जेल के कमरे इतने संकरे थे कि केवल उसमे सोया जा सकता था। दिन के समय कैदी बाहर निकल कर छोटी-छोटी टोलियों में रहते थे।चार्ल्स शोभराज की जीवनकथा लिखने वाले लेखक थॉमसन कहते हैं, "जब वह जेल के अन्दर था तो वहां की दुनिया देखकर उसकी रूह कांप उठी। शोभराज जेल में चुपचाप ही रहता था। उसे जो भी मांगना होता था वह इशारे से मांगा करता था। वहां के जेलर उसे किताब पढ़ने के लिए कहते थे, पर वह नहीं पढ़ता था।"

पारसी लड़की सेंटाल से हुआ प्यार
सेंटाल एक खूबसूरत पारसी लड़की थी, जो अपने माता- पिता के साथ रहती थी। एक पार्टी के दौरान वह चार्ल्स से मिली। उसके बाद वह जल्द ही चार्ल्स के करीब आ गई।दरअसल, चार्ल्स की शारीरिक बनावट ऐसी थी कि ऐसा संभव ही नहीं था कि कोई भी लड़की उसके आकर्षण से मुक्त रह सके और उस पर फिदा न हो जाए। और फिर उसके पास अपनी बहादुरी के किस्से भी थे। चार्ल्स ने सेंटाल को बताया कि वह साइगॉन के एक धनी परिवार से है। उसके बोलने का अंदाज बिलकुल किवियों की तरह था। इस तरह उसने सेंटाल को शादी के लिए तैयार कर लिया, लेकिन इसके बावजूद सेंटाल के माता-पिता को वह शादी के लिए नहीं मना सका।
 
सेंटाल के माता-पिता फ्रेंच कैथोलिक प्रथा को माननेवालों में से थे। उन्हें चार्ल्स से शादी इसलिए मंजूर नहीं थी, क्योंकि चार्ल्स के पिता कैथोलिक समुदाय से नहीं थे। सेंटाल कहती थी, "मुझे फर्क नहीं पड़ता की वह अमीर है या नहीं। उसके बाद आठ महीने के जेल के दौरान वह हमेशा उसके साथ रहती थी। वह अपने दोस्तों तथा साथ काम करने वाले लोगों को ये बताती थी, कि उसे सेना में भर्ती करने के लिए बुलाया गया था।

भारत में सेंटाल ने दिया बच्चे को जन्म
धीरे-धीरे समय बीतने के साथ-साथ उसने अपने घोटालों से काफी धन एकत्र कर लिया। इसके बाद सेंटाल के माता-पिता थोड़े सन्तुष्ट हो गए और चार्ल्स से उसकी शादी करा दी। कुछ दिनों बाद सेंटाल को महसूस हुआ कि वह गर्भवती हो चुकी है तो उसी समय चार्ल्स ने यूरोप छोड़ने का निर्णय लिया। वह यहां ओरिएंट क्षेत्र का काम संभलता था। जहां से वह पूरे फ्रांस में नकली चेक के जरिए धोखाधड़ी का काम करता था। चार्ल्स एक बार फिर फेलिक्स से मिला और उसकी कार एक-दो दिन के लिए उधार मांगी। इसके बाद उसने अपना कमाया हुआ पूरा धन उस कार में भरा और पूर्वी यूरोप के रास्ते देश छोड़ दिया।

इस बीच उसके सम्पर्क में आने वाले लोगों को भी वह लूटता रहा। अंततः फेलिक्स से मांगी हुई कार के साथ इस्तांबुल जा पहुंचा। और अंत में वह भारत आ गया, जहां सेंटाल ने चार्ल्स के बच्चे को जन्म दिया। इस बीच पेरिस में अधिकारियों की एक टीम चार्ल्स और उसकी पत्नी के बारे में पूछताछ के लिए चार्ल्स के दोस्तों से मिल रही थी।

अंतराष्ट्रीय अपराधी बन गया था चार्ल्स
चार्ल्स ने एक सिरिंज खरीदी और उससे अपना खून निकला और पी गया। वह ऐसा दिख रहा था जैसे अल्सर हुआ हो। उसे हास्पिटल ले जाया गया, जहां से वह ईरान भाग गया। अगले साल उसने यूरोप के चक्कर काटे पर उसने ज्यादा समय कहीं नहीं बिताया। शायद उसे पकड़ने का डर सता रहा था। चार्ल्स के पास करीब 10 पासपोर्ट थे, जिसमें से कुछ चुराए और कुछ ख़रीदे हुए थे। वह अपना पासपोर्ट बदलता और फिर उसी नाम से वह जाना जाता। उसने बाद में पुलिस को जानकारी दी कि 1972-१९७३ के दौरान उसने कराची, रोम, तेहरान, काबुल, युगोस्लाविया, बुल्गारिया, और कोपेहेगन की यात्राएं कीं।

इधर काबुल में अपने परिवार को छोड़कर भागने के बाद वह समझ चुका था कि इस शादी का अंत हो चुका है। बेचारी सेंटाल जान चुकी थी कि अंतराष्ट्रीय अपराध पुलिस संगठन के पास उसके पति के साथ उस पर भी अपराधिक गतिविधियों से संबंधित मामला दर्ज हो चुका है। वह नहीं चाहती थी कि वह दुबारा चार्ल्स से मिले। वह कुछ समय बाद वह पेरिस चली गई। अंतराष्ट्रीय अपराधी के तौर पर कुख्यात होने के बाद चार्ल्स को छिपने के लिए कुछ ही देश बचे थे।

थाइलैंड में मैरी एंड्री को बनाया प्रेमिका
इस प्रकार इस्तांबुल में वह अपने छोटे भाई एंड्र्यू से मिला, जहां वह चार्ल्स के साथ घोटालों में सक्रिय हो गया। क्योंकि चार्ल्स अंतराष्ट्रीय अपराधी हो चुका था, इसलिए उनसे अपने भाई को राजी कर लिया था कि वह फ्रांस कभी नहीं जाएगा, बल्कि वह पूर्व के देशों में जाएगा जहां उसे कोई पहचान न पाए। फिलहाल वह तुर्की गया, जहां उसने कुछ छोटी-मोटी लूटपाट की और वहां से फरार हो कर ग्रीस चला गया। वहां एथेंस में उसने कुछ अच्छे नागरिकों को अपना शिकार बनाया।

उसी दौरान वह छोटे-मोटे आभूषणों की चोरी में गिरफ्तार कर लिए गया। चार्ल्स ने खुद को एंड्र्यू बताया और जेल से कुछ हफ़्तों बाद छूट गया। जब तक पुलिस को इस बात की जानकारी हुई वह देश से निकल चुका था।
इधर एंड्र्यू को पुलिस गाड़ी से भागने से जुर्म में ग्रीस पुलिस ने उस पर और चार्ज लगा दिया और इस तरह वहां की अदालत ने उसे 18 वर्ष की सजा सुनाई। इस बीच थाइलैंड में चार्ल्स मैरी एंड्री के संपर्क में आया जो उसकी प्रेमिका बनी।

नेपाल जेल में रचाई निहिता से शादी
1970 के दशक में उसने विदेशी पर्यटकों को अपना निशाना बनाना शुरू किया। वह उनका मित्र बनकर उनके लिए नशीली दवाइयां देता, फिर उनकी हत्या कर देता था। विदेशी महिलाएं उसका मुख्य शिकार बनतीं थी। 1972-1976 के बीच उसने 24 लोगों की हत्या की थी। 1986 में चार्ल्स अपने साथियों के साथ तिहाड़ जेल से भागने में कामयाब रहा। वर्ष 2003 में नेपाल जाने के बाद उसे 1975 में हुए दो हिप्पियों के हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा दी गई।

नेपाल में सजा काटने के दौरान 2008 में चार्ल्स ने बहुत ही छोटी आयु की एक नेपाली लड़की निहिता बिस्वास के साथ जेल में ही शादी कर ली। निहिता और उसके परिजन चार्ल्स साथ उसके संबंध को अपनी रजामंदी दे चुके हैं। एक कुख्यात अपराधी होने के बावजूद चार्ल्स को जो लोकप्रियता हासिल हुई वह अपने आप में बहुत बड़ी है। अपराधों और हत्याओं जैसी वारदातों को अंजाम देते हुए चार्ल्स ने जिन तकनीकों और रणनीति का प्रयोग किया वह अपने आप में हैरानी पैदा करने वाली भी है।
अधिक जानकारी के लिए पढ़िए घमासान न्यूज़

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