इंदौर यात्रा में यहाँ रुके थे गुरु नानक जी, दिया था प्रेम का सन्देश

इंदौर यात्रा में यहाँ रुके थे गुरु नानक जी, दिया था प्रेम का सन्देश

इंदौर यात्रा में यहाँ रुके थे गुरु नानक जी, दिया था प्रेम का सन्देश

गुरु नानक का अवतरण उन दिनों हुआ,जब सामान्य जन घोर कष्ट में अपना जीवन व्यतीत कर रही थी। लोगों को सच्चा रास्ता दिखाने के लिए गुरु नानक जी ने अनेक यात्राएं कीं। वे नासिक शहर से होते हुए बुरहानपुर आए थे।वहा वे ताप्ती नदी के किनारे ठहरे। फिर वहां से ओंकारेश्वर से होते हुए इंदौर आए थे । यहाँ इमली के पेड के नीचे रूककर इंदौरवासियो को प्रेम का सन्देश दिया | जहा वर्तमान में इमली साहिब गुरुद्वारा स्थित है |

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इंदौर में राजवाड़े के करीब ही यशवंत रोड पर इमली साहिब गुरुद्वारा स्थित है | पहले आप सब को यह बता दिया जाय कि उन्ही गुरूद्वारे को साहिब कहा जाता है जहा गुरुनानक साहब रुके थे |’गुरु नानक देव जी यात्रा के दौरान इंदौर आए थे’ यह अपनी पुस्तक ‘लीलावती’ में श्री महिपत ने उनकी इंदौर यात्रा का वर्णन किया है। उन्होंने कहा “नानक जी ने यहाँ इमली का एक वृक्ष लगाया। यहीं पर गुरुद्वारा इमली साहिब स्थापित है। गुरुदेव ने लोगों को मूर्ति पूजा से रोका और शब्द की महत्ता बताई।”गुरु नानकजी ने हर जगह यही उपदेश दिया कि ईश्वर एक है, उसे विभाजित नहीं किया जा सकता। वह सबका साझा है, वह हर एक के अंदर मौजूद है। तन धोने से मन अच्छा नही हो जाता.
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अपनी पुस्तक में उनके चमत्कारों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा, ” जब लोगों ने आदर के साथ उनके चरणों को छूना चाहा तो वे लोग चकित हो गए। उन्हें केवल प्रकाश ही प्रकाश दिखाई दिया।” गुरुनानक देवजी बेटमा की दुःखी जनता का उद्धार करने के लिए इंदौर से वहां गए । वहां गडरियों ने गुरुजी का बहुत आदर-सत्कार किया, उनके उपदेश सुने जब लोगों ने उनके सामने पानी की समस्या के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि “उस जगह धन्ना करतार कहकर कुदाली से जमीन खोदो।” लोगों ने ऐसा ही किया तो वहां पर मीठे पानी का झरना फूट पड़ा। आज वहां पर एक बहुत सुंदर गुरुद्वारा है। गुरु नानक जी भोपाल में ईदगाह हिल और उज्जैन में शिप्रा नदी के पास उदासियों के अखाड़े में भी पधारे थे।
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