भैरव जयंती: सभी कष्टों से मुक्ति चाहिए तो ना करे ये काम
भैरव जयंती: सभी कष्टों से मुक्ति चाहिए तो ना करे ये काम

देश के प्राय: सभी क्षेत्रों में श्री भैरव की पूजा होती है। 30 नवंबर को है भैरव जयंती है। सभी कष्टों से मुक्ति और संकट के निदान में भैरव साधना फलदायी है। भैरव देवीतीर्थ में हैं, तो शिवधाम में भी हैं। भगवान शिव के क्रोधावतार, देवी के पहरुआ, कालों के काल महाकाल कष्ट से मुक्ति और संकट के निदान में भैरव साधना तुरंत फलदायी है। भैरव की सवारी काला कुत्ता है। इनका व्रत रख उपासना करने से हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती हैं।
भैरव की लोकप्रियता शैव, शाक्त व वैष्णव, तीनों संप्रदायों में समान रूप से है। काल भैरव जयंती की रात को काल भैरव की अर्चना करनी चहिए।लेकिन कुछ काम ऐसे है जिन्हें कालाष्टमी के दिन नहीं करना चाहिए। अगर आपने किया तो जिंदगी भर पछताना पड़ेगा-
1)ध्यान रखे बिना भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा किए बिना काल भैरव पूजा नहीं करना चाहिए।
2) अगर आप भैरव जयंती का व्रत करने का संकल्प लेते है तो अन्न ग्रहण न करें। माता-पिता और गुरु का अपमान न करें।
3) इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए। ना ही कोई ऐसा व्यवहार करे जिससे किसीको बुरा लगे। घर और अपने आसपास की साफ-सफाई करें।
4) नमक न खाएं। नमक की कमी महसूस होने पर सेंधा नमक खा सकते हैं।
5) कुत्ते को भोजन कराएं। कुत्तों को नुकसान नहीं पहुचाए,उनको को मारे नहीं।
6) रात को पूजा अर्चना करे, भजन करे। रात में सोना नहीं चाहिए। संभव हो तो जागरण करें।
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