टीसीएस इस साल 40 फीसदी ज्यादा फ्रेशर्स नियुक्त करेगी

टीसीएस इस साल 40 फीसदी ज्यादा फ्रेशर्स नियुक्त करेगी

टीसीएस इस साल 40 फीसदी ज्यादा फ्रेशर्स नियुक्त करेगी

मुंबई: इस साल जारी कैंपस प्लेसमेंट सीजन में टीसीएस पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी ज्यादा नए इंजीनियरिंग स्नातकों को नौकरी की पेशकश कर सकती है। प्रमुख क्षेत्रों व इलाकों में मजबूत मांग को देखते हुए कंपनी ऐसा करने जा रही है। मुंबई मुख्यालय वाली कंपनी ने कहा, वह करीब 28,000 आवेदकों को नौकरी की पेशकश करेगी, जिनका चयन नैशनल क्वालिफायर टेस्ट के जरिए होगा, जिसे टीसीएस ने पहली बार शुरू किया है। पिछले साल कंपनी ने करीब 20,000 नई नौकरियों की पेशकश की थी और इस बाबत कैंपस में साक्षात्कार के जरिए उम्मीदवार चुने गए थे। हालांकि साल 2016 और 2015 में कंपनी ने क्रमश: 35,000 व 40,000 फ्रेशर्स को नौकरी की पेशकश की थी।
कंपनी ने कहा कि उम्मीदवारों के चयन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा आयोजित किए जाने से चयन प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाए जाने में मदद मिली है और इसके जरिए देश भर की अग्रणी प्रतिभा तक हम पहुंच पाए हैं। उदाहरण के लिए 1,800 इंजीनियरिंग कॉलेज के करीब 2.70 लाख छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। इसके बाद परीक्षा में उनके अंकों के आधार पर करीब 50,000 लोगों को साक्षात्कार के लिए चुना गया। इस तरह से कुल मिलाकर 25,000 से 28,000 लोगों के नाम छांटे गए और इसमें से 1,000 अग्रणी छात्रों को फ्रेशर्स के मुकाबले दोगुने वेतन की पेशकश की गई। पिछले मॉडल में टीसीएस 400 चुनिंदा कॉलेजों से कैंपस साक्षात्कार के जरिए फ्रेशर्स की नियुक्ति करती थी। कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी एन गणपति सुब्रमण्यम ने कहा, वास्तव में पहले हम करीब 300-400 कॉलेजों से ही नियुक्ति कर रहे थे यानी हम देश की अग्रणी प्रतिभा गंवा रहे थे। अब हम ऐसी प्रतिभाओं की पहचान कर सकते हैं और उसे अपनी ओर खींच सकते हैं मसलन पूर्वोत्तर राज्यों व देश के दूरदराज के कॉलेज पहुंचकर। सामान्य तौर पर ज्यादातर फ्रेशर्स वित्त वर्ष की पहली दो तिमाही में नौकरी जॉइन करते हैं। प्रबंधन ने कहा कि वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में कुल 10,227 नौकरियों में प्रशिक्षुओं की संख्या करीब आधी रही।
सुब्रमण्यम ने कहा कि जांच परीक्षा का ढांचा ऐसा बनाया गया है कि कंपनी उम्मीदवार की ताकत व कमजोरियों का आकलन कर पाए और फीडबैक के आधार पर उसे दोबारा परीक्षा देने की पेशकश कर सके और विशिष्ट प्रतिभा हो तो उसे प्रशिक्षण की पेशकश की जा सके। हमारा मानना है कि फीडबैक की ऐसी व्यवस्था की पेशकश टीसीएस की जिम्मेदारी है। टीसीएस की डिजिटल परीक्षा में पास करने वालों को कंपनी सालाना करीब 7 लाख रुपये का पैकेज दे रही है, जो फ्रेशर्स के 3.5 लाख रुपये के मुकाबले दोगुनी है।

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